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हिंदू धर्म से तिरस्कृत 3000 दलित इस्लाम कबूल करने को तैयार

हिंदू धर्म से तिरस्कृत 3000 दलित इस्लाम कबूल करने को तैयार

हिंदू धर्म से तिरस्कृत 3000 दलित इस्लाम कबूल करने को तैयार।

मनुवाद के रीढ़ की हड्डी को अपने पैर  की जूती की ठोकर से तोड़ने वाले प्रख्यात समाजसेवी, अंधविश्वास व जातिवाद को जड़ से खत्म करने वाले  के  ई वी रामास्वामी पेरियार साहब ने कभी नहीं सोचा होगा कि जिस जातिवाद के कलंक खत्म करना चाहते थे। वह आज पूरे देश देश में धोनी रफ्तार के साथ फल फूल रहा है। और 25 दिसंबर 1927 भारत रतन बाबासाहेब आंबेडकर साहब ने मनुष्य में असमानता व वर्ण व्यवस्था भेदभाव करने वाली किताब मनुस्मृति को शायद इसलिए जलाया था शुद्र पर होने वाले अत्याचार हमेशा हमेशाा  के लिए खत्म हो जाएंगे। और एक समतामूलक समाज की स्थापनाा होगी जिसमें हर मनुष्य का बराबर सम्मान। लेकिन अफसोस  92 साल गुुजर  जानेेेेे के बाद शूद्रों का जीवन जस के तस बना हुआ है। शुद्र पर बढ़ते अत्याचार को देखते हुए भीमा कोरेगांव की 2000 साल पुरानी  त्रिशदी आंखोंं के  तैरने लगती है। यह अत्याचार का सिलसिला आखिर कब खत्म होगा

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नादुर निवासियों और तमिल पुलीगल काची के सदस्यों मेट्टुपालयम एक धर्म सभा आयोजित कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि हिंदू धर्म में दलितों पर हो रहे अत्याचार व दुर्व्यवहार देखते हुए 3000 दलित इस्लाम धर्म कबूल करेंगे। जिसकी घोषणा तमिल पुलिगल काची के महासचिव एम इलावेनिल ने की।

पूरा मामला क्या था

तमिलनाडु की  नादुर में 17 दलितों के घर के पास शिव सुब्रमण्यम का घर था जो हिंदू था। जिसने 17 दलित समुदाय के लोगों के सामने  दीवार इसलिए खड़ी कर दी। दलितों से अलग रहना चाहता है। जिसको लेकर दलित समाज के लोगों ने शिव सुब्रमनियन का पुरजोर विरोध विरोध करती हुई जिला प्रशासन को अवगत कराया। जिस पर जिला प्रशासन ने दलित समाज के लोगों की कोई मदद नहीं की। प्रदेश सरकार ने दलित समाज को एससी / एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान होने के बावजूद  राज्य सरकार में शिव सुब्रमण्यम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की

“शिवसुब्रमण्यम ने एक भेदभावपूर्ण मकसद के साथ दीवार का निर्माण किया। इसका समर्थन करने के लिए कोई खंभे नहीं थे। उन्होंने अपने घर को पास में रहने वाले दलितों से अलग करने के लिए दीवार बनवाई। भेदभाव का हवाला देते हुए, हम अधिकारियों से शिवसुब्रमण्यन पर दर्ज मामले को बदलने और एससी / एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन राज्य सरकार ने दलित अत्याचार के मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी शिव सुब्रमण्यम को शक्ति सख्त कार्रवाई की मांग की लेकिन तमिलनाडु पुलिस ने आरोपी को मामूली धारा में गिरफ्तार कर जेल भेजा जिसको कोर्ट ने 20 दिन के अंदर ही जमानत पर छोड़ दिया। पीड़ित दलित समाज के लोग लोकतांत्रिक तरीके से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए दलित समाज के लोगों को संगीन धाराओं में कोयंबटूर जेल में  बंद कर दिया। बाद में जमानत पर छूट गए नादुर के दलित समाज के लोगों ने तमिल पुलीगल काची सदस्यों से हिंदू धर्म त्याग कर इस्लाम धर्म् कबूल करने का फैसला लिया गया।

तमिल पुलिगल काची के महासचिव एम इलावेनिल ने घोषणा करते हुए कहा कि अभियान चलाकर दलित हिंदुओं को मुस्लिम धर्म में परिवर्तन कराया जाएगा।

दलितों के महापुरुषों ने समाज को बचाने के लिए जहां रात दिन एक कर दिया वही आज देश में दलित समाज नेता सिर्फ वोट की खेती करते हैं उन्हें दलित अत्याचार से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए दलित समाज को एकजुट होकर खुद समाज को मजबूत करने का काम करना चाहिए। तभी संभव हो सकता है कि दलित समाज का उत्थान हो सके।

रिपोर्ट न्यूज एडिटर सुशील बाबू सागर टाइगर पोस्ट न्यूज़

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