Indian politics

Election results 2019 मोदी को हराना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी है।विस्तार से बता रहे हैं। रिटायर्ड लेक्चरर विद्या राम जी

Election results 2019 मोदी को हराना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी है।विस्तार से बता रहे हैं। रिटायर्ड लेक्चरर विद्या राम जी

Election results 2019 मोदी को हराना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी है।देखिऐ अब तक का सबसे जबरदस्त विश्लेषण बता रहे हैं रिटायर्ड लेक्चरर विद्याराम जी।

दिल्ली के  डायरेक्टरेट  आफ  एजुकेशन  विभाग Directorate of Education Department Delhi

में तैनात  से  रिटायर हुए सीनियर  लेक्चरर   विद्या  राम जी Lecturer Vidya Ram  राजनीतिक और सामाजिक चिंतन के एक

बड़े चेहरे हैं। जो लगातार सोशल मीडिया पर रहकर बखूबी अपनी बात रखते हैं। अब तक फेसबुक पर

Lecturer Vidya Ram के  5000 friend  हैं । जो लगातार उनके साथ सक्रिय रहते हैं। आइए जानते हैं।

उनके अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक  विश्लेषण। जिसमें उन्होंने कहा है कि मोदी को हराना मुश्किल ही

नहीं बल्कि नामुमकिन modee ko haraana mushkil hee nahin balki naamumakin

मेरा इस आर्टिकल को लिखने  का मात्र  एक ही आशय है कि सच्चाई से आप सभी को रूबरू करा सकूं। हालांकि

आप सभी समझदार हैं, फिर भी मैं अपना विचार रखने की हिमाकत  कर  रहा हूं।भारतीय  राजनीति में, मोदी जी

Modi ji अब मंझे हुए नेता ही नहीं बल्कि एक मजबूत ब्रांड बन चुके हैं। उनको राजनीति के खेल में मात देना  अब सामान्य नेता के

वश की बात नहीं रही। मोदी जी Modi ji एक ऐसी फैक्ट्री का प्रोडक्ट हैं जिसे अपनी विचारधारा के अनुरूप ढालने

के लिए, उत्पादक को एक लंबा वक्त तय करना पड़ा।वह फैक्ट्री है आरएसएस RSS हिन्दू  अस्मिता  और  सनातनी

विचारधारा को अक्षुण रखने के उद्देश्य को लेकर बना आरएसएस, आज एक विशाल वट वृक्ष बन चुका है।

निःसंदेह इस विचारधारा को सुदृढ़ करने हेतु समय समय पर अनेकों बुद्धिजीवियों ने अपना योगदान किया है। यहां

से तपकर निकलने वाला व्यक्ति अपनी आइडियोलॉजी ideology  से ट्स से मस नहीं हो सकता है। अपनी इस

आइडियोलॉजी ideology को सम्पूर्ण  भारत  में और विदेशों में भी प्रचारित और प्रसारित करते हुए लगभग 70

साल हो गए। यही नहीं अभी भी यह कार्य अनवरत रूप से चल रहा है और आगे भी चलता रहेगा।

मोदी जी Modi ji और अमित शाह जी, भारतीय राजनीति में दो ऐसे पात्र हैं, जिनकी तुलना एक epic रामायण के दो

मुख्य पात्र राम और लक्ष्मण के रूप में की जा सकती है।(भाईयो, बहनों, यह कहकर अगर मैंने कोई धृष्टता कर दी

हो, तो माफ़ करना)। यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि कुछ लोग मुझ पर मोदी भक्त होने का ठप्पा लगा देंगे। परेशान

होने की कोई बात नहीं है, मैं अपनी आइडियोलॉजी से कभी भी समझौता नहीं कर सकता हूं। वास्तव में, श्री

अमित शाह, निश्चित ही राजनीति के चाणक्य हैं, उन्होंने अपनी सूझ बूझ से आज बीजेपी को विश्व की सबसे बड़ी

पार्टी होने का तमगा हासिल करवाया। पार्टी को फर्श से अर्श पर लाने का श्रेय श्री आडवाणी जी और श्री अमित

शाह को जाना स्वाभाविक ही है। अमितशाह की चुनाव प्रबंधन और बूथ प्रबंधन की रणनीति , प्रबंधन शास्त्र की

पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एक शोध का विषय बन सकता है। निश्चित ही  चुनाव, बड़ी  बड़ी सभाओं को

संबोधित करके नहीं जीते जा सकते हैं। चुनावी सभाओं   में भीड़ इकट्ठी करना, पार्टी की हवा बनाने और पार्टी

कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का साधन मात्र है। बड़ी बड़ी सभाओं में लोगों को एकत्र करने का मकसद अपने

ब्रांड लीडर के प्रति आकर्षण पैदा करना होता है।
भारतीय राजनीति में मोदी जी एक ब्रांड बन चुके हैं,

एक ऐसी ब्रांड जो अन्य ब्रांडों के बाज़ार पर पूरी तरह कब्जा जमाने वाली ब्रांड। मोदी जी राजनीति के ऐसे

शातिर खिलाड़ी हैं जो जनता की नब्ज टटोलने में माहिर हैं। वे जनता की भावना के अनुरूप अपने तरकश से एक

एक कर के तीर निकालते हैं और सटीक निशाना साधते हैं और उनके विरोधी चित्त हो जाते हैं। मोदी जी एजेंडा खुद

सेट करते हैं और फिर अपने विरोधियों को उस पर चलने के लिए बाध्य कर देते हैं।

सन् 2014 में मोदी जी Modi ji जब प्रधानमंत्री बने, उसके अगले दिन से ही वे 2019 के चुनाव के लिए रणनीति बनाने में

लग गए। अपने भरोसेमंद साथी श्री अमितशाह Amit Shah के नेतृत्व में पार्टी को अधिक से अधिक राज्यों में

विस्तार करने के कार्य में लग गए। मोदी Modi ji और अमितशाह Amit Shah की जोड़ी ने अपने प्रचार तंत्र

को तथा प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, टीवी मीडिया, सोशल मीडिया तक पहुंचाया और अपनी पकड़

मजबूत की। उधर गांव गांव, शहर शहर, जमीनी स्तर पर बूथ लेवल तक काम किया। अपने कार्य कर्ताओं को

प्रोत्साहित किया। उनके इस काम में आरएसएस  RSS और उससे जुड़े अनेकों संगठनों ने लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का काम किया।उधर सत्ता से बाहर पार्टियां अपने हाथ पर

हाथ रखकर बैठी रहीं। उन्होंने जमीनी स्तर पर अपने संगठन को मजबूत करने के लिए समुचित प्रयास नहीं

किए। राजनीति की अच्छी फसल काटने के लिए, खेत को सालभर तैयार करना पड़ता है। बीजेपी सालभर खेतों को

तैयार करती रही, और वक्त आने पर हिन्दू अस्मिता और राष्ट्रीयता का बीज बोया। समय समय पर पानी और खाद

के रूप में लोकलुभावन योजनाओं को भी  धरातल पर उतारने की कोशिश करते हुए, पूरे पांच साल गुजार दिए।

फिर 2019 में वोटों की लहलहाती फसल को काट लिया। विपक्षी , इस मामले में आलसी  ही साबित हुए। वे तब

जागते हैं, जब चुनाव आयोग, चुनाव का ढिंढोरा पीट पीट कर तारीखों का ऐलान कर देता है।चुनावों के दौरान, बड़ी

बड़ी भीड़  इकट्ठी करके, रटी  रटाई बातों को,  भाषण के रूप में जनता को पेश कर देने मात्र से चुनाव नहीं जीते जा

सकते हैं। पार्टियों के बड़े बड़े नेता माहौल तैयार करने और पार्टी की हवा बनाने में तो कारगर साबित होते हैं । लेकिन

जमीनी स्तर पर उनकी बातों और विचारधारा से प्रभावित मतदाता को पोलिंग बूथ तक लाने में जिस पार्टी का तंत्र

सफल हो जाता है, वही चुनाव में बढ़त बना लेता है।इस काम में  पार्टी के समर्पित  कार्यकर्ता,  बूथ  लेवल के

कार्यकर्ता और पन्ना प्रमुख अपनी असरदार भूमिका निभाते हैं।हरेक प्रतिष्ठित राजनैतिक दल का अपना

कैडर वोट होता है, उस कैडर वोट को लुभाने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, वह तो संबंधित पार्टियों

को मिलना ही है। आवश्यकता होती है फ्लोटिंग वोटर को अपने पाले में लाने की। यह वह वोटर होता है, जो  अभी

तक किसी पार्टी से जुड़ा नहीं है।इसे अपनी ओर आकर्षित करने में पार्टी के बड़े नेता की छवि और उसकी  ब्रांडिंग

असरदार साबित होती है। ऐसे  वोटरों को  अपनी ओर आकर्षित करने के लिए मोदी जी उनकी नब्ज को टटोलते

हुए टारगेट बनाते हैं और वे किसी हद तक सफल भी हुए हैं।इंदिरा गांधी का मूलमंत्र,( कड़ी मेहनत, पक्का इरादा

अनुशासन और दूरदृष्टी), अब मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने अपना लिया है। वे कर्मठ हैं और पार्टी के प्रति पूरी

निष्ठा और लग्न के साथ लगे हुए हैं। जब तक आप जनता से कनेक्ट नहीं होंगे और उनके दिल को नहीं छुएंगे, तब

तक लोकप्रिय नहीं  हो सकते हैं। भारत  की  जनता को विकास हो, न हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। रोजगार मिले, न

मिले, कोई फर्क नहीं पड़ता है। जनता चाहती है कि एक ऐसा पीएम हो, जो हिन्दू अस्मिता का पोषक हो,पाकिस्तान

के दांत खट्टे करने का साहस रखता हो और उसके घर में मारने की हिम्मत रखता हो। ऐसा हीरो ही भारत के दिलों

पर राज कर सकता है। अब जनता ने ऐसे ही हीरो को पुनः अगले 5 साल के लिए चुन लिया है। निश्चित ही भारत की

जनता बहुत समझदार है। भारत में लोकतंत्र का भविष्य उज्जवल जान पड़ता है। बाकी विपक्षी दलों को मेरी राय

है। कि वे अगले पांच साल तक विश्राम कर सकते हैं, और जब कभी राज्यों के चुनाव आएं तो अपनी रस्म अदायगी

के लिए थोड़ा कष्ट हो सकता है, और फिर कुंभकर्ण की नींद सो जाएं, जब रावण को जरूरत पड़े, तो दुंदुभी

बजाकर आपको जगाकर रण भूमि में ले जाएगा,फिर युद्ध के मैदान में  जोशीले शब्द बाण , दोनों ही ओर  से छोड़े

जाएंगे और आगे क्या कहूं अंत आपको मालूम है।
कुछ लोगों को अवश्य कष्ट होगा, लेकिन मेरी तो सच

बोलने की आदत है और इससे समझौता नामुमकिन है। मैं फिर कहूंगा कि, वर्तमान में मोदी जी भारतीय राजनीति में

एक ऐसा तपता सूर्य है कि जिसके आसपास फटकने की कोई फिलहाल हिमाकत करने की सोच भी नहीं सकता है।

स्वतंत्र भारत के  इतिहास  में  शायद  मोदी  जी  पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अपने पद के दायित्वों का निर्वहन

करते हुए सबसे अधिक समय अपनी पार्टी को दिया है। बीजेपी एक मात्र ऐसी पार्टी है जो हमेशा इलेक्शन मोड

पर रहती है और जिसका कार्यकर्ता सालों साल पार्टी के काम में लगा रहता है। इनके लिए पार्टी ही देश है, पार्टी पहले देश बाद में।

रिपोर्ट सुशील बाबू सागर चीफ एडिटर टाइगर पोस्ट न्यूज़ नेटवर्क  नोएडा उत्तर प्रदेश भारत

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