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राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर क्यों मचा राजनीतिक घमासान।

राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर क्यों मचा राजनीतिक घमासान।

राफेल डील पर शीर्ष अदालत के  सुनवाई के बाद क्यों मचता जा रहा राजनीतिक घमासान।देखी ताजा हालातों पर पूरा विश्लेषणः

राफेल डील मामला एक ऐसा मामला है। जो आज पूरी तरह राजनीतिक हो चुका है। इस के बल पर जहां विपक्ष

मौजूदा सरकार पर हमला बोलकर सत्ता में आने की  भरसक कोशिश कर रहा है। अपनी राजनीतिक बाणों से

मौजूदा सरकार को घायल करने की कोशिश कर रही है वहीं इस मामले में मौजूदा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी सत्ता के लिए इसको हानिकारक मान रही है।

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को क्या क्या हुआ

राफेल सौदे (Rafale Deal) के दस्तावेजों लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका पर

सुनवाई करते हुए कहा राफेल डील से जुड़े दस्तावेज क्या आपके पास है जिस पर अटॉर्नी जनरल वेणु गोपाल ने

कहा कि  दस्तावेज चोरी हो चुके हैं। और जो दस्तावेज याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण द्वारा  शीर्ष अदालत में पेश किए गए थे। वह पूरी तरह क्लासिफाइड दस्तावेज थे।

इसलिए द हिंदू में छपी क्लासिफाइड दस्तावेज के आधार पर शीर्ष अदालत में आगे सुनवाई नहीं की जा सकती है

जिस पर सुप्रीम  कोर्ट के सीजेआई ने  केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल वेणु  गोपाल से पूछा किस सरकार ने

राफेल डील के मामले में अब  तक क्या क्या कार्रवाई की है। अगर इस मामले को लेकर सीबीआई को जांच का

निर्देश दिया जाता है। तो देश को भारी नुकसान होगा।

दरअसल जिस राफेल डील को लेकर केंद्र सरकार लगातार बचने की कोशिश कर रही है। वहीं मुद्दा को

विपक्ष जोर शोर से उठाने की कोशिश कर रहा है। जिस तरह फिर डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सरकार के अटॉर्नी

जनरल वेणु  गोपाल द्वारा बयान पेश करते हुए कहा गया राफेल डील से जुड़े दस्तावेज चोरी हो गए अब सवाल यह

उठता है कि अगर रफाल डील से जुड़े दस्तावेज चोरी हो चुके हैं तो सरकार द्वारा क्या एफआईआर दर्ज लिखाई

गई क्या सरकार ने एफआईआर की कॉपी सुप्रीम कोर्ट में दिखाई। मान लीजिए देश की जनता प्रधानमंत्री और

सरकार को पूरी तरह ईमानदार मानती है इसमें कोई शक नहीं। लेकिन अगर किसी को शक होता है तो सरकार को

उसे पुख्ता सबूत देना चाहिए। ऐसे में ना तो सरकार जनता या कोर्ट को पुख्ता सबूत दे पा रही है। और ना ही कुछ

बताने की स्थिति में है। तो ऐसी स्थिति में सरकार संदेह के घेरे में जरूर आते दिखती है। क्या ऐसा संभव हो सकता है

कि सरकार जिस  दस्तावेज को सबसे महत्वपूर्ण मान रही है। तो उस दस्तावेज के खो जाने के बाद FIR दर्ज कराने

से क्यों कतरा रही है. दूसरा सवाल आप ने राफेल डील के मामले में किन किन लोगों पर क्या क्या कार्रवाई की।जिस पर

अटॉर्नी जनरल ने कहा  राफेल डील के  मामले में अगर सीबीआई को कुछ जांच का निर्देश दिया जाता है तो देश

को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। गहराई से इस बात को देश के हर व्यक्ति को जानना चाहिए कि अगर राफेल डील

के मामले का खुलासा होता है। तो देश में इस से किन-किन का नुकसान होगा। इसका जवाब तो देश के बच्चे बच्चे के

पास है। और वही देश की जनता चाहती है कि राफेल डील के मामले की बारीकी से जांच होना चाहिए। जो संदेश

देश की जनता के बीच में है। वह पूरी तरह खत्म होना चाहिए। लेकिन जिस तरह केंद्र सरकार राफेल डील के

मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। उसे हो सकता है कि या फिर राफेल डील के मामले में केंद्र सरकार को

भारी नुकसान उठाना पड़े। क्योंकि यह राफेल डील का मामला संदेह के घेरे में। और इस संदेश का जवाब किसी

के पास नहीं है। सरकार ईमानदारी से जांच कराने की जगह लगातार इस केस को  विस्थापित करने की कोशिश

कर रही है। जिसके कारण विपक्ष लगातार सरकार पर हावी होता जा रहा है। तो दूसरी तरफ को मोदी सरकार के

समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता राफेल डील के मामले में मोदी सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं। लेेकिन  राफेल

डील के दस्तावेज चोरी हुए के मामले में उनके पास कोई जवाब नहीं है

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर राफेल डील पर राहुल गांधी ने क्या कहाः

राफेल डील के मामले में सुनवाई कर रही माननीय सुप्रीम कोर्ट  की सुनवाई के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने

प्रतिक्रिया देते हुए देते हुए ट्विटर पर लिखा अब #RafaleScam में पीएम के खिलाफ मुकदमा चलाने

के लिए पर्याप्त सबूत हैं।भ्रष्टाचार का निशान उसके साथ शुरू और समाप्त होता है उस महत्वपूर्ण Rafale

फाइलें जो उसे विभक्त कर रही हैं, अब सरकार द्वारा “चोरी” रिपोर्ट की गई हैं, सबूतों का विनाश और एक स्पष्ट कवरअप है।

जिस तरह राफेल डील को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच केंद्र सरकार का चाहे मीडिया यह मोदी

समर्थक कितना भी समर्थन कर ले। जब तक खुला तो नहीं हो जाता। कब तक यह रहस्य बरकरार रहेगा। की

राफेल डील का पूरा सच आखिर है क्या। ऐसी स्थिति में राफेल डील को लेकर देश की जनता को यह तय करना ही होगा। कि हम किसके साथ हैं।

 

 

 

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